रात कोथकान के कारणअच्छी नींद आयी।चढ़ाई के हिसाबसे आज कादिन पूरे ट्रैकका कठिनतम दिन होने वाला था। करीब बारह किलोमीटर काट्रैक है, जिसमें दस किलोमीटर चढ़ाईमिलने वाली है।सुबह सभी जल्दीउठ कर तैयारहो गए। रातको ही नाश्ताऔर दिन के पैक्ड भोजन केलिए बात होगयी थी। नाश्ताकरके दुमुक गाँवके वजीर का मन्दिर देखने गए, छोठा सा मन्दिर है, जिसका इसगाँव के सामजिकजीवन पर भरपूरअसर है।
मन्दिर देखकर वापिस आए तो होम स्टे का हिसाब चुकता करना था। सुविधाओं के हिसाब से घर के मालिक ने अत्यधिक पैसे लिए। और जरुरी सुविधाएं भी ना-मात्र की ही उपलब्ध करवाई। दुमुकसे ठीक सामनेवाले पहाड़ की चोटी पर बुग्याल साफ़नजर आ रहेथे। अनुमान लगजाता है किवहीँ चढ़ना है। शुरुआत अच्छी-खासी उतराईसे हुई। करीबदो किलोमीटर नीचेमैना गाड़ नदीतक लगातार उतरनाहै। जहाँ दुमुक२४०० मीटर कीऊंचाई पर हैवहीँ मैना गाड़१९०० मीटर। दोकिलोमीटर में ५०० मीटरनीचे को भयंकरवाली उतराई कादर्जा दे सकतेहैं। मैना गाड़उतरने में हीडेढ़ घण्टा लगगया। रास्ते मेंदो स्थानीय महिलाएं मिली, वो एक भैंसको पनार बुग्याल छोड़नेजा रही थी।हमको साथ-साथचलने को जैसेही उन्होंने कहा, हाथ जोड़ लिए।मैना गाड पहुंचकर डुबकीमारने का मनकिया तो महेशजी को छोड़करसभी नदी मेंकूद पड़े। काफीदेर तक पानीसे अठखेलियां करनेके उपरान्त बारीथी पनार फतहकरने की। डोभालने तुरन्त आजका स्लोगन देदिया "चल मेरे यार, चढ़ जा पनार"।
मैना गाड़(छोठी नदी को गढ़वाली में गाड़ कहते हैं) से घनघोर जंगलके बीच सेचढ़ाई शुरू होजाती है। करीबआधा किलोमीटर चढ़नेके बाद छोठासा बुग्याल आताहै। मस्ती मेंसभी चढ़े जारहे थे। महेशजी आज पानीबचा-बचा करपी रहे थे। ये बात जबउन्होंने मुझे बताई, तोउनको निश्चिन्त कियाकि आप खूबपानी पीजिये। हमबुग्यालों की ओर चढ़रहे हैं, पानीकी कमी नहींहोगी। आज काहमारा पहला पड़ावथा तोली ताल, सभी गप्पें मारतेऔर मस्ती करतेहुए चढ़े जारहे थे। वन-सम्पदा की उर्गमघाटी में भरमारहै, ये देखकरख़ुशी हुयी किइस वर्ष उत्तराखण्ड केजंगलों में लगीभीषण आग सेये क्षेत्र पूरीतरह सुरक्षित बचारहा। हरियाली चारोंओर बिखरी पड़ीथी। पक्षियों कीचहचहाने की मधुर ध्वनिसे कानों कोबड़ा सुकून मिलरहा था। अन्यथादिल्ली जैसे महानगरों मेंदिन भर हार्नकी ही आवाजेंसुनने को मिलतीहैं। कुछ आगेबढे तो जंगलसे काखड (हिरनकी प्रजाति) कीआवाज सुनाई दी।मैंने सभी कोइस बारे मेंबताया कि निश्चिन्त होकरचलो, काखड इसक्षेत्र में घूम रहाहै, इसका अर्थहै कि आस-पास कोई शिकारीजानवर नहीं है।
दुमुक सेनिकले चार घण्टेसे भी ज्यादाहो गए थे, सुबह नाश्ता भीभरपेट नहीं खायाथा। भूख सभीको लगने लगीथी, एक छोठेसे बुग्याल मेंबैठकर बिस्कुट खायेगए, कुछ देरआराम किया औरफिर आगे बढ़चले। नाक कीसीध में हीचढ़ते जाना था, रास्ता भटकने वालीकहीं स्तिथि अभीतक इस ट्रैकपर मुझे नजरनहीं आयी थी।लगातार एक घण्टाचढ़ते रहने केबाद तोली तालपहुँच गए। महेशजी सबसे पीछेचल रहे थे, जब वो तोलीताल से सौमीटर नीचे थेतो मैंने ऊपरसे आवाज लगाई कि आ जाओआपको जादू दिखाताहूँ। बेहद खूबसूरत तोलीताल सामने था।वृत्ताकार रूप में फैलाये ताल औरचारों ओर बुग्याल कामैदान, ऐसा लगताहै, जैसे जंगलोको बीच मेंसे हटाकर बुग्याल कीखेती की गयीहो।
तोली तालमें पानी काकोई प्राकृतिक स्रोतनहीं है, बारिशका पानी बुग्यालों सेरिसकर निचले भागमें जमा होजाता है, जिससेयहाँ पर तालका निर्माण होगया है। काफी जानवरयहाँ चरते हुएनजर आये। हमसभी भी इसताल के बुग्यालों मेंजूते उतारकर लेटगए। गुनगुनी धूपमें बुग्यालों मेंलेटे रहने काभी अलग हीआनन्द है।
तोली तालमें करीब एकघण्टे तक आरामकरने के बादआगे बढ़ने कीतैयारी शुरू की।ऊपर चोटी परकाले बादल भीमंडराने लगे थे, बारिशकी आशंका केचलते तेज कदमोंसे ताल केबीच से हीआगे बढे तोपाया कि पूरेताल में जगह-जगह जानवरों कीहड्डियां बिखरी पड़ी हैं।करीब तीस-चालीसजानवर अभी चरभी रहे थे।फिर कुछ जानवरों कीहालत देखकर समझआया कि स्थानीय निवासीबूढ़े हो चुकेजानवरों को यहाँ लाकरछोड़ देते हैं।कुछ खुद मरजाते हैं, कुछजंगली जानवरों काशिकार बन जातेहैं। यहीं तालसे कुछ ऊपरएक स्थानीय मंदिरभी है। एकवन विभाग काकमरा भी बनाहै, लेकिन उसकीहालत देख करये बात साफ़समझ आ जातीहै कि यह क्षेत्र पर्यटन के हिसाबसे सरकारी उपेक्षा काजबरदस्त शिकार हुआ है।
तोली ताल सेआगे बढे तोसर के ऊपरकाले बादलों नेडेरा डाल लिया।भूख भी लगनेलगी थी, कहींपानी का सोतामिलेगा तो वहांपर भोजन करेंगेयह सोच करआगे बढ़ते रहे।करीब एक घण्टाचलने के बादबारिश की हल्की-हल्की बूंदे गिरनीशुरू हो गयी, और पानी कासोता भी मिलगया। एक बड़ीसी चट्टान केनीचे आसरा ढून्ढकर बैठ गए।भोजन भी खोललिया, सोचाजब तक खानाखाएंगे, बारिश भीबन्द हो हीजाएगी।
भोजन कियेआधा घण्टे सेभी ऊपर होगया, फिर भीबारिश बन्द नहींहुई तो महेशजी और अमितभाई को आगेबढ़ने को कहदिया। असल मेंइन दो लोगोंके पास बारिशसे बचने केलिए पोंछो था। जबकि मैं, मिश्राऔर डोभाल ऐसेही मुहँ उठाकर ट्रैक परआ गए थे।करीब दस मिनटबाद लगा किबारिश हल्की होगयी तो हमतीनो भी चट्टानकी ओट सेनिकलकर आगे चलदिए। लेकिन इंद्रदेव ने तोआज हमारी परीक्षा लेनेका पूरा मनबना रखा था।तेज बारिश फिरसे शुरू होगयी। मेरे पासएक शॉल थाउसी को ओढ़लिया, मिश्रा जीने गमछा औरडोभाल ने मफलर ओढ़ लिया।अब ये सबकितनी देर तकहमको भीगने सेबचा पाते। जैसेही बारिश तेजहोती हम किसीपेड़ या चट्टानकी ओट लेलेते, कम होजाती तो कुछ कदमआगे बढ़ जाते।चढ़ाई ने वैसेही ख़त्म नाहोने की कसमखा रखी थी।
बारिश के साथऐसी लुका-छिपिखेलते हुए करीबदो घण्टे सेआगे बढे जारहे थे। जबमहसूस हुआ किअब बारिश जल्दीसे बन्द नहींहोगी और लुका-छिपि से कोईहल नहीं निकलेगा इसलिएटक्कर लेने मेंही भलाई है। मैदान में कूद पड़े और बारिश में भीगतेहुए चढ़ने लगे।महेश जी सबसेपीछे छूट रहेथे, मुझे मजबूरीमें उनके साथ-साथ चलना पड़रहा था। अमितभाई, डोभाल औरमिश्रा जी बिनारुके आगे निकलगये। डोभाल कोएक टूटा छातामिल गया था, कोई फेंक करचला गया होगा।उस छाते कीसबसे बड़ी खासियतये थी किउसके बीचों बीचएक बड़ा साछेद था। महेशजी आज फिरसे पस्त होनेलगे थे। कुछउनका जूता भीगीली जमीन परअच्छे से ग्रिपनहीं बना पारहा था, जिससेफिसलकर सीधे कईमीटर नीचे लुढ़कनेका खतरा बराबरबना हुआ था।
पनार बुग्याल पहुँचने केलिए आखिरी आधाकिलोमीटर सीधे चढ़ना पड़ताहै, जो तोड़कर रख देताहै। मैं महेशजी का हौसलाबढ़ाते-बढ़ाते उनसेकुछ आगे चलताजा रहा था।जैसे ही सौमीटर आगे आता, रुककर उनकी प्रतीक्षा करनीपड़ती। आखिरी मेंजब बुग्याल क्षेत्र मेंप्रवेश किया तोलगा पहुँच गये हैं। एक धारदिख रही थीजो पहाड़ काउच्चतम स्थान साप्रतीत हो रहाथा। महेश जीने मुझसे पूछाकि अब औरकितना चलना होगा? मैं खुद यहाँपहली बार आयाथा, फिर भीकह दिया किजो धार सामनेदिख रही हैइसके बाद होनाचाहिए। तेज कदमोंसे जब मैंधार तक पहुंचातो आधा किलोमीटर दूरगुज्जरों की भेड़ें बुग्यालों मेंचरती नजर आयी।लगा कि पहुँचगए।
बारिश भीहल्की हो चुकीथी लेकिन बर्फीली हवासीधे शरीर कोचुभ रही थी।महेश जी कोआवाज लगाकर बतायाकि शायद पहुँचगए हैं। येझोपडी जो दिखरही थी येमुख्य रास्ते सेकुछ नीचे थी, बुग्यालों में वैसे रास्ताबनाने की जरुरत नहीं होती, जिधरसे नजदीक लगेवहीँ से निकलपड़ो। मैंने भीमुख्य रास्ते कोछोड़कर जैसे हीझोपडी की ओरबढ़ना शुरू किया, वहीं से एकगुर्जर भाई नेआवाज लगाई किऊपर को जाओ।उसको जब ये पूछा कि अभीकितना आगे जानाहै तो जबाबमिला आधा किलोमीटर आगेठिकाना है। निराशहोकर वापिस मुख्यरास्ते पर आकर आगे बढ़नाशुरू कर दिया।कुछ आगे बढ़ाही था किगुर्जरों के चार कुत्तों नेभोंकते हुए मेरीओर दौड़ना शुरूकर दिया। येकुत्ते इतने खतरनाकहोते हैं किमजाल क्या हैबाघ या कोईजंगली जानवर इनकेरहते भेड़ों परहमला कर दे।मैं एक जगहपर चुपचाप खड़ाहो गया, चारोंकुत्ते आए औरसूँघकर आगे बढ़गए। इतने मेंउनको दूर सेही महेश जीकी आहट मिलीतो उनकी ओरदौड़ पड़े।
मुझेतो इन कुत्तों केचाल-चलन काअनुभव था, कहीं महेशजी डर नाजाएँ, इसलिए जल्दी सेकुछ कदम वापिसलौटना पड़ा। जिसकाडर था वहीहुआ, महेश जीमेरे को आवाज़ेंलगा रहे थे।उनको जोर सेआवाज लगाकर बतायाकि चुपचाप खड़ेरहो ये सूंघकर खुद हीलौट जाएंगे। कुत्तों केजाने के बादसीधा रास्ता दिखाई दे रहा था, और ठिकाना भी।तेज क़दमों सेआगे बढ़ गया, बारिश लगातार हुए ही जा रहीथी। जब ठिकानेपर पहुंचा तोलगा बड़ी राहतमिलेगी, लेकिन इम्तेहान तोअभी और भीथे। अमित भाईढाबे के किचनमें बैठे मिले, मुझे देखते हीबोले कि कमरेमें जाकर चेंजकर लो। येसुनते ही बड़ीख़ुशी हुई। मैंने पूछा हमारा कमराकौन सा है? बोले आखिरी वालेदरवाजे से अन्दरचले जाओ, सीढियां मिलेंगी फर्स्टफ्लोर पर हमाराकमरा है, डोभालवहीँ है, बाहरसे आवाज लगालेना। दिमाग तो खटका कि झोपड़ियों मेंकब से येफ्लोर सिस्टम होनेलगा ? चलो कोईबात नहीं, कमरेमें चले जाताहूँ।
दरवाजे केबाहर से डोभालको आवाज लगाई तो उसने भीऊपर से जबाबदिया कि हाँसीढ़ियों से ऊपर आजा। पहले तोसीढ़ियों की हालत देखकर ही शंकाहुई, लकड़ी कीबनी हुई थी।फिर ऊपरचढ़ा तो कमरेकी रौनक देखकर मुहँ सेएक भी बोल नहीं फूटा। चुपचापरेंगकर ऊपर पहुँचा, गीले कपडे फेंके, और कम्बल मेंदुबक गया। असलमें जो हमकोकमरा मिला थावो झोपडी मेंऊपर की तरफसामान या लकड़ियों को रखने की जगहहोती है। आजदिन भर बारिशकी वजह सेकोई ग्रुप यहाँसे आगे नहींबढ़ पाया। ऊपरसे हम पांचऔर एक ग्रुपहमसे पहले यहाँपहुँच गया। भीड़ इतनी हो गई कि जगहबची नहीं। ढाबे वाले नेजब पूछा कियहाँ सो सकतेहो तो डोभालऔर अमित भाईने तुरन्त हाँकह दी।
कुछ देरबाद महेश जीभी मुझे आवाज़ेंलगाते-लगाते पहुँचगए। उनका भीस्वागत किया तोउनके मुहँ सेभी कोई बोलनहीं फूटा। चुपचापरेंगकर वो भीऊपर चढ़े औरकम्बल में दुबकगए। बाहर तूफानीहवा और बारिशअभी भी जारीथी। मिश्रा जीसे विनती कीतो वो हिम्मतकरके नीचे उतरेऔर हमारे लिएदो चाय लेआए। आज यहाँपनार में बिस्तरों कीभी सख्त कमीथी। हम पांचलोगों को ओढ़ने-बिछाने के लिएकुल पांच कम्बलऔर एक रजाईमिली हुई थी।सोने की जगहइतनी कि तीनभी आ जाएँतो गनीमत होगी।ऊपर से बर्फीली हवा, और बारिश। जैसे-तैसे करके हमपाँचों घुस गए।
करीब एक घण्टेबाद ढाबे वालेने खाना खानेके लिए आवाजलगाई तो उसकोकह दिया कियहीं पर पहुंचा सकतेहो तो ठीकहै, अन्यथा बाहरआने की हिम्मतनहीं बची। ढाबेवाले ने चावलका पतीला, दालका कुकर, सब्जीकी कढ़ाई औररोटी वहीँ पहुंचादी। ठेठ जंगलीस्टाइल में भोजनकिया और बर्तनखिसका के कोनेमें रख दिए। अब एकऔर परेशानी थीकि सोने सेपूर्व टॉयलेट कैसेजाया जाए। एकबार तो मनकिया कि यहीं कोने मेंकर दूँ, लेकिनयहाँ पर रातहमको ही गुजारनी थी।प्रभु का नामलिया और हिम्मतकरके निपट हीआया। इसके बादऐसा प्रण करके दुबका किसुबह से पहलेनीचे उतरने कीनौबत नहीं आई।
आज कादिन चढ़ाई केमामले में कठिनतमरहा जहाँ दुमुकसे शुरू केदो किलोमीटर मेंसीधे ५०० मीटरनीचे उतरकर मैनागाड़ पहुंचे थे, वहीँ मैना गाड़(१९०० मीटर) सेतोली ताल (२६४०मीटर) और फिरपनार बुग्याल (३५००मीटर) पहुँचे। कुलमिलकर दस किलोमीटर में१६०० मीटर ऊपरचढे। जो किबहुत ही ज्यादामानी जा सकतीहै। कल सेचढ़ाई के हिसाबसे आसान दिनमिलने वाले हैं, इसी से संतोषकर जैसे-तैसेसोने का प्रयासकरने लगे।
क्रमशः.....
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| दुमुक में इसी घर में रुके थे |
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| कंडी |
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| दुमुक |
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| दुमुक |
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| सर्दियों के लिए पालतू जानवरों का बिस्तर का जुगाड़ |
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| स्थानीय देवता का मन्दिर |
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| दुमुक |
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| गढ़वाली में इसको कहते हैं "दें लगाना" |
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| दुमुक होम स्टे के मालिक |
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| मैना गाड़ |
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| मैना गाड़ की उतराई |
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| पनार के जंगल |
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| मैना गाड़ पुल |
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| मैना गाड़ |
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| मैना गाड़ पुल |
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| मैना गाड़ में डुबकी का आनन्द |
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| मैना गाड़ में डुबकी का आनन्द |
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| जहाँ पानी मिले भर लो |
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| ओ दूर महेश जी |
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| चल मेरे यार, चढ़ जा पनार |
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| चढ़े चलो |
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| पहुँच गए "तोली ताल" |
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| अमित तिवारी |
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| बुग्यालों में लेटने का आनन्द |
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| तोली ताल |
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| बाघ का बचा खुचा भोजन |
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| सूरज मिश्रा |
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| तोली ताल देवता मन्दिर |
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| तोली ताल से आगे |
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| पनार में फाइव स्टार कमरा |
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| पनार में फाइव स्टार कमरा |
इस यात्रा के सभी वृतान्त निम्न हैं:-
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Hi Ramta jogi
ReplyDeleteIt's delighted to read this description in a post although most of us are known to all this earlier too.
But you have a great writing skill and you use it beautifully while describing all the necessary details about the journey towards the Panar. It's delightful to read how you Incorporated your friends in this story.
All in all a good post with beautiful pics of beauty of the Himalaya.
Keep it up!
Thanx for sharing!
धन्यवाद पा जी.
Deleteदुमुक, बुग्याल और पनार
ReplyDeleteइनको पार करते दोस्त चार
चढ़ाई मुश्किल,और पानी की धार
जिंदाबाद, जबरदस्त और शानदार
हा हा हा...शानदार.
Deleteधन्यवाद मुकेश जी.
ग़ज़ब यात्रा रही होगी भाई ये तो। महेश जी ने भी बहुत हौंसला दिखाया। फाइव स्टार रूम शानदार था। अब आगे क्या हुआ इसका इंतजार है।
ReplyDeleteजी महेश जी का हौसला काबिले तारीफ रहा. बुरी तरह थक गए थे लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी.
DeleteNice post with lot of beautiful pictures.
ReplyDeleteधन्यवाद नरेश जी.
Deleteजब पनार बुग्याल की धार पर था समुद्रतल से उचाई कुछ 3300 मीटर के आसपास थी,मैं पूरी तरह भीग चूका था, ऐसी ठण्ड आज तक मुझे कभी नहीं लगी, एक समय तो लगा की निपट जाऊंगा पर बाबा बियर ग्रिल्स के सर्वाइवल शो की जय हो सारे भीगे कपडे उतारे सूखे पहने फिर हलकी बरसात में ही 30 पुश अप मारे, तब जाके सांसे और हाथ-पांव गर्म हुए। दूरी की जानकारी, बरसात में भीग जाना और रुकने की सही स्थिति पता न होने के कारण का अंत के 1 km बहुत ही बोझिल हो गए थे मेरे लिए :) पर सुबह सो के उठा तो चमत्कार ही हो गया :D
ReplyDeleteपनार में अकेले तुम ही थे जो बार बार बाहर निकलने की हिम्मत भी कर पा रहे थे. अपने तो बस की नहीं थी उस बर्फीले तूफ़ान में बाहर निकलने की.
Deleteजबरदस्त पोस्ट है भाई पढ़ कर मजा आ रहा है, लग रहा है जैसे हम भी यात्रा में आप के संग हो। अगले भाग का इंतजार रहेगा।
ReplyDeleteधन्यवाद सचिन भाई.
Deleteशानदार ट्रेकिंग वर्णन बीनू भाई । ईमानदारी से हिसाब दिया पूरे ट्रेकिंग का । मुझे तो कुछ कठीन ही लग रहा है ट्रेक । वैसे आज तक कोई ट्रेक नही किया हमने। ,😁😀
ReplyDeleteलेख ने वही होने का वास्तविक अहसास भी करा दिया ।
बढ़िया विवरण और शानदार चित्र ।
जी कठिन तो है, लेकिन बारिश और तूफ़ान ने और ज्यादा कठिन बना दिया था.
DeleteFantastic account of a taxing day of trekking. Hope to meet and trek with you someday. Thank you.
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteभाई पढ़ कर मज़ा आ गया। ऐसा लगा जैसे मैं भी साथ था।
ReplyDeleteधन्यवाद प्रवीण जी.
Deleteपनार तो बहुत ही खूबसूरत है और मैना गाढ़ उससे भी ज्यादा ! वृतांत बढ़िया चल रहा है
ReplyDeleteधन्यवाद योगी भाई
Deleteबहुत ही शानदार वृतांत, फोटोग्राफी व खूबसूरत नज़ारे।
ReplyDeleteमज़ा आ गया।
धन्यवाद संदीप जी
Delete